रतीराम श्रीवास, टीकमगढ़। मध्य प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई लाड़ली बहना योजना को लेकर अब योजना से वंचित गरीब महिलाओं ने सरकार से सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। महिलाओं का कहना है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा शुरू की गई यह योजना यदि केवल चुनावी घोषणा नहीं, बल्कि महिला कल्याण की स्थायी योजना है, तो आज भी बड़ी संख्या में पात्र गरीब महिलाएं इससे बाहर क्यों हैं?
जिले की कई वंचित महिलाओं ने आरोप लगाया कि वे लंबे समय से योजना में अपना पंजीयन कराने की मांग कर रही हैं, लेकिन नए पंजीयन की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा रही है। दूसरी ओर, योजना में शामिल महिलाओं को सरकार लगातार आर्थिक सहायता दे रही है और रक्षाबंधन जैसे पर्व पर अतिरिक्त राशि भी दी जा रही है।
महिलाओं का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा लाड़ली बहना योजना की राशि बढ़ाना और रक्षाबंधन के अवसर पर अतिरिक्त 250 रुपये की राशि देना स्वागत योग्य है, लेकिन सवाल यह है कि जो गरीब महिलाएं योजना से बाहर हैं, उनकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकार उनके लिए क्या कर रही है?
“योजना में शामिल महिलाएं ही बहन क्यों?”
वंचित महिलाओं ने सवाल उठाते हुए कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का त्योहार है। यदि सरकार इस अवसर पर लाड़ली बहनों को आर्थिक सहायता देकर उनका सम्मान कर रही है, तो योजना से बाहर रह गई गरीब महिलाएं क्या किसी की बहन नहीं हैं? क्या वे अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र नहीं बांधतीं?
महिलाओं ने आरोप लगाया कि रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर सरकार का यह रवैया उन्हें ‘सौतेले व्यवहार’ जैसा महसूस करा रहा है। उनका कहना है कि सरकार को पात्रता के दायरे में आने वाली सभी गरीब महिलाओं को योजना से जोड़ने के लिए नए पंजीयन का रास्ता खोलना चाहिए।
मुख्यमंत्री से “राखी के उपहार” की मांग
जिले की वंचित महिलाओं ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को “मामा” के रूप में संबोधित करते हुए मांग की है कि रक्षाबंधन के अवसर पर जिस तरह योजना में शामिल महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है, उसी तरह योजना से वंचित पात्र गरीब महिलाओं के लिए भी आर्थिक उपहार की घोषणा की जाए।
महिलाओं ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में उन्हें सशक्त बनाना चाहती है तो केवल योजना की राशि बढ़ाने के बजाय नए पात्र हितग्राहियों के पंजीयन की प्रक्रिया शुरू करना अधिक जरूरी है।
अब सवाल यह है कि सरकार इन महिलाओं की मांग पर क्या कदम उठाती है? क्या प्रदेश में लाड़ली बहना योजना से वंचित पात्र महिलाओं के लिए नए पंजीयन का अवसर मिलेगा या हजारों-लाखों महिलाएं आगे भी योजना के लाभ से बाहर रहेंगी? रक्षाबंधन के मौके पर उठे इन सवालों ने सरकार के सामने महिला कल्याण की नीति को लेकर नई बहस खड़ी कर दी है।

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