भोपाल, 2 जून 2026: मध्य प्रदेश में लोक निर्माण विभाग के 9 इंजीनियरों ने मिलकर 140 करोड रुपए का घोटाला करने के लिए, विधिवत शासकीय प्रस्ताव बनाकर भेज दिया। यह घोटाला मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित रायसेन, ग्वालियर, नर्मदापुरम, मंदसौर और मुरैना जिलों में किया जाना था। इस मामले की जांच जरूरी है क्योंकि इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि इससे पहले भी ऐसा हुआ होगा।
बात ऐसी है कि, लोक निर्माण विभाग के 9 इंजीनियरों ने भोपाल, रायसेन, ग्वालियर, नर्मदापुरम, मंदसौर और मुरैना की 19 सड़कों को पूरी तरह से खराब घोषित करके, दोबारा बनाने का प्रस्ताव भेज दिया। प्रस्ताव के अनुसार इन सड़कों के निर्माण पर 140 करोड रुपए खर्च किए जाने थे। प्रस्ताव मंजूर भी हो जाता लेकिन एक अज्ञात जागरूक नागरिक ने बताया कि, मध्य प्रदेश में जितनी भी सड़कों को बनाने का प्रस्ताव डिपार्टमेंट को भेजा गया है उसमें 19 सड़क ऐसी हैं, जिनकी गारंटी खत्म नहीं हुई है। मतलब इन सड़कों को अभी भी ठेकेदार को मेंटेन करना है। मतलब डिपार्टमेंट को सड़क बनाने की जरूरत ही नहीं है।
जैसे ही इस जानकारी को वेरीफाई किया गया, सबके कान खड़े हो गए। जिन सड़कों की मरम्मत की जिम्मेदारी ठेकेदार की है, 9 इंजीनियर मिलकर उन सड़कों को दोबारा बनाने के लिए बजट प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। इसको किसी भी एंगल से देखिए, यह एक घोटाला है। डिपार्टमेंट ने सभी इंजीनियरों को नोटिस जारी कर दिया है और 15 दिन में जवाब देने के लिए कहा है।
किस इंजीनियर ने कितना प्रस्ताव भेजा
- योगेंद्र कुमार ने भोपाल-रायसेन की 8 सड़कों पर व्हाइट टॉपिंग के प्रस्ताव दिए। इनकी लागत 51.65 करोड़ रुपए बताई गई।
- राकेश निगम ने 3 सड़कों के लिए 27.50 करोड़ रुपए मांगे।
- एसआर परते ने 19.03 करोड़ रुपए से 3 सड़कों को दोबारा बनाने का प्रस्ताव भेजा।
- एके जैन ने ग्वालियर में 13.56 करोड़ रुपए गांधी रोड बनाने का प्रस्ताव दिया। ओमहरि शर्मा ने भी यही प्रस्ताव भेजा था।
- आदित्य सोनी ने मंदसौर में 5.20 करोड़ रुपए से 2 सड़कों के प्रस्ताव दिए।
- पीके झा ने रायसेन जिले में छींद मार्ग के लिए 5.12 करोड़ रुपए की मांग की।
- सुभाष पाटिल और संजय रायकवार ने नर्मदापुरम में 2.23 करोड़ रुपए से 4 सड़कों की मरम्मत का प्रस्ताव दिया।

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