बुंदेलखंड में साइबर ठगी का बढ़ता जाल! झांसी पुलिस की बड़ी कार्रवाई, टीकमगढ़ पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल

Updesh Awasthee
0
टीकमगढ़
बुंदेलखंड में मोबाइल के जरिए साइबर ठगी का कथित नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय होने के आरोप लगते रहे हैं। अब उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई के बाद इस पूरे नेटवर्क को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। झांसी पुलिस ने कटेरा थाना क्षेत्र के काड़ों के खिरक सहित आसपास के दो गांवों में पुलिस बल के साथ छापामार कार्रवाई कर बड़ी संख्या में संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।

पुलिस कार्रवाई में 23 लोगों को चिन्हित किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार तलाशी के दौरान करीब 120 मोबाइल फोन, 35 डेबिट कार्ड, 29 बैंक पासबुक, 20 आधार कार्ड, 284 ग्राम सोना और 1408 ग्राम चांदी सहित अन्य सामग्री बरामद की गई है। इतनी बड़ी मात्रा में मोबाइल और बैंकिंग दस्तावेज मिलने के बाद पुलिस साइबर ठगी के संभावित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

OTP लेकर ठगी करने का आरोप

झांसी के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में सामने आया है कि संदिग्धों द्वारा मोबाइल फोन के माध्यम से लोगों से संपर्क कर OTP सहित बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल कर ठगी किए जाने की आशंका है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हैं और ठगी की रकम किन-किन खातों के माध्यम से इधर-उधर की जाती थी।

टीकमगढ़ सीमा से सटे इलाकों पर भी उठ रहे सवाल

कटेरा थाना क्षेत्र मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के लिधौरा थाना क्षेत्र से लगा हुआ है। सीमा से सटे वन एवं ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से साइबर ठगी के कथित नेटवर्क के सक्रिय होने की चर्चाएं सामने आती रही हैं। काड़ों के खिरक जैसे दुर्गम इलाकों को लेकर भी अब जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

स्थानीय स्तर पर सवाल यह उठ रहा है कि जब झांसी पुलिस ने सीमा से लगे इलाके में इतनी बड़ी कार्रवाई कर संदिग्धों और बैंकिंग सामग्री को पकड़ा है, तो मध्य प्रदेश की पुलिस इन इलाकों में सक्रिय संभावित साइबर गिरोहों की गतिविधियों की जांच क्यों नहीं कर रही है?

वर्षों से चल रहे नेटवर्क की जांच हुई तो खुल सकते हैं कई राज

स्थानीय लोगों का कहना है कि साइबर ठगी, फर्जी लकी ड्रा और मोबाइल के जरिए लोगों को झांसे में लेने वाले गिरोहों की गतिविधियों को लेकर क्षेत्र में लंबे समय से चर्चा रही है। कुछ वर्ष पूर्व चंदेरा थाना क्षेत्र के स्यावानी इलाके से छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा कथित लकी ड्रा मामले में एक आरोपी को पकड़े जाने की घटना का भी हवाला दिया जा रहा है।

यदि झांसी पुलिस वर्तमान कार्रवाई में पकड़े गए संदिग्धों से कॉल डिटेल, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल लेन-देन और संपर्कों के आधार पर गहन पूछताछ करती है, तो इस नेटवर्क की जड़ें मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ सहित बुंदेलखंड के अन्य हिस्सों तक पहुंचने की संभावना की भी जांच की जा सकती है।

टीकमगढ़ पुलिस की भूमिका पर सवाल

झांसी पुलिस की कार्रवाई ने टीकमगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि सीमा से लगे क्षेत्रों में साइबर ठगी का नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका है, तो मध्य प्रदेश पुलिस को भी मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित थाना क्षेत्रों में संदिग्ध मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की जांच करनी चाहिए।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रत्येक संदिग्ध की भूमिका का निर्धारण पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा। किसी व्यक्ति को केवल हिरासत या पूछताछ के आधार पर अपराधी मानना उचित नहीं होगा।

झांसी की कार्रवाई बनी जांच की नई कड़ी

झांसी पुलिस की कार्रवाई ने बुंदेलखंड में साइबर अपराध के संभावित नेटवर्क की जांच के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी सामने रख दी है। अब जरूरत इस बात की है कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश पुलिस आपसी समन्वय से संयुक्त जांच करे। यदि मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की कड़ियां खंगाली जाती हैं, तो संभव है कि वर्षों से चल रहे कथित साइबर ठगी के नेटवर्क के कई चेहरे सामने आ जाएं।

सवाल सिर्फ झांसी में हुई कार्रवाई का नहीं है, सवाल यह भी है कि टीकमगढ़ और सीमा से लगे इलाकों में साइबर ठगी की शिकायतों और संदिग्ध गतिविधियों पर अब तक कितनी गंभीरता से जांच हुई?

अब लोगों की नजर टीकमगढ़ पुलिस की अगली कार्रवाई पर

Post a Comment

0 Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!