मध्य प्रदेश वह राज्य है जिसने 73वें संविधान संशोधन के बाद सबसे पहले पंचायती राज अधिनियम लागू किया। अनूपपुर जैसा आदिवासी बाहुल्य जिला, जो कभी शहडोल का हिस्सा था और 2003 में अलग जिला बना, यहां पंचायती राज का महत्व और भी बढ़ जाता है।
अनूपपुर जिले की भौगोलिक चुनौतियां, वन क्षेत्र और जनजातीय समाज के बीच ग्राम पंचायत ही वह पहली सरकार है जो सीधे जनता से जुड़ती है। जैतहरी, अनूपपुर, पुष्पराजगढ़ और कोतमा जैसे जनपदों में पंचायतों ने बीते वर्षों में स्वच्छता, जल संरक्षण, प्रधानमंत्री आवास, मनरेगा और लाड़ली बहना जैसी योजनाओं को जमीन पर उतारा है।
पंचायती राज : गांव का अपना गणतंत्र
स्वतंत्रता दिवस हमें याद दिलाता है कि सत्ता का विकेंद्रीकरण ही सच्ची स्वतंत्रता है। ग्राम सभा में जब गांव के लोग अपने विकास का फैसला खुद करते हैं, तो वही 15 अगस्त 1947 के सपनों की पूर्ति है।
आज ग्राम पंचायतें सिर्फ नाली-सड़क बनाने वाली संस्था नहीं रहीं, वे -
ग्राम स्वराज की वाहक हैं - जल जीवन मिशन से हर घर नल
आत्मनिर्भरता का केंद्र हैं - स्व-सहायता समूहों से महिला सशक्तिकरण
डिजिटल इंडिया की कड़ी हैं - समग्र पोर्टल, ई-पंचायत और डिजिटल भुगतान
विशेष उल्लेख : ग्राम पंचायत दुधमनिया, जनपद पंचायत जैतहरी
इस स्वतंत्रता दिवस पर अनूपपुर जिले में एक ग्राम पंचायत का कार्य विशेष रूप से उल्लेखनीय और प्रेरणादायक रहा है।
ग्राम पंचायत दुधमनिया, जनपद पंचायत जैतहरी, जिला अनूपपुर के सरपंच एवं सचिव ने उल्लेखनीय कार्य किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दुधमनिया पंचायत ने टीम भावना से काम करते हुए शासन की योजनाओं को पारदर्शिता और प्राथमिकता के साथ लागू किया है। चाहे स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव को स्वच्छ बनाने का संकल्प हो, जल संरक्षण के लिए किए गए प्रयास हों, या जरूरतमंद हितग्राहियों तक आवास और पेंशन योजनाओं का लाभ पहुंचाना हो - सरपंच और सचिव की जोड़ी ने प्रशासन और जनता के बीच एक आदर्श सेतु का काम किया है।
उनकी कार्यशैली में जनभागीदारी स्पष्ट दिखती है। ग्राम सभाओं का नियमित आयोजन, रिकॉर्ड का डिजिटल संधारण और गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की सोच ने दुधमनिया को जैतहरी जनपद में एक मॉडल पंचायत के रूप में स्थापित किया है। यह कार्य न केवल प्रशंसनीय है, बल्कि अन्य पंचायतों के लिए अनुकरणीय भी है।
स्वतंत्रता दिवस का संकल्प
15 अगस्त हमें सिर्फ झंडा फहराना नहीं सिखाता, बल्कि जिम्मेदारी का बोध भी कराता है। अनूपपुर जैसे जिले के विकास के लिए जरूरी है कि हम अपनी पंचायतों को और मजबूत करें। जब सरपंच और सचिव जैसे स्थानीय जनप्रतिनिधि और कर्मचारी ईमानदारी से काम करते हैं, तभी लोकतंत्र गांव-गांव तक जीवंत होता है।
इस स्वतंत्रता दिवस पर आइए हम सब ग्राम पंचायत दुधमनिया सहित जिले की सभी कर्मठ पंचायतों के कार्यों की सराहना करें और पंचायती राज को और सशक्त बनाने का संकल्प लें।
जय हिंद, जय मध्यप्रदेश, जय ग्राम स्वराज।

