15 अगस्त 2026 - स्वतंत्रता दिवस। यह दिन न केवल विदेशी शासन से मुक्ति का स्मरण कराता है, बल्कि आत्मनिर्भरता, एकता और सामूहिक प्रयास की भावना को भी जागृत करता है। स्वतंत्र भारत के निर्माण में सहकारिता आंदोलन ने हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सहकारिता को ग्राम स्वराज और आर्थिक स्वाधीनता का आधार माना था। आज मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में आदिवासी बहुल क्षेत्रों में कार्यरत आदिम जाति सेवा सहकारी समितियाँ इसी भावना को जीवंत रखे हुए हैं।
आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों के उल्लेखनीय कार्य
अनूपपुर जिला मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में स्थित है, जहाँ आदिवासी समुदाय की आबादी उल्लेखनीय है। यहाँ की आदिम जाति सेवा सहकारी समितियाँ ग्रामीण और वन क्षेत्रों के लोगों को वित्तीय सहायता, कृषि आदान, विपणन सुविधा और सामूहिक विकास के अवसर प्रदान कर रही हैं। ये समितियाँ न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनी हैं, बल्कि सामाजिक एकता और स्वावलंबन की भावना को भी मजबूत कर रही हैं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब पूरा देश आजादी की गाथा गा रहा है, तब इन समितियों का योगदान विशेष रूप से याद आता है।
भेजिरी, बेनीबारी और लीला टोला सबसे आगे
इस संदर्भ में भेजिरी, बेनीबारी और लीला टोला की आदिम जाति सेवा सहकारी समितियाँ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इन तीनों समितियों के प्रबंधक एवं प्रशासक ने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने आदिवासी किसानों और श्रमिकों को सहकारी ऋण, बचत योजनाएँ, कृषि उपकरणों की आपूर्ति तथा उत्पाद विपणन में सहायता प्रदान कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद इन अधिकारियों ने सदस्यों के बीच विश्वास जगाया, पारदर्शिता बनाए रखी और सहकारिता के मूल्यों को व्यवहार में उतारा। भेजिरी की समिति ने क्षेत्रीय आदिवासी परिवारों को आर्थिक रूप से जोड़ने का कार्य किया, बेनीबारी की समिति ने कृषि आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया, जबकि लीला टोला की समिति ने वनोपज और लघु उद्योगों से जुड़े सदस्यों को संगठित कर उनकी आय बढ़ाने में सहायता की।
आजादी केवल राजनीतिक नहीं, आर्थिक और सामाजिक भी होनी चाहिए
तीनों अधिकारियों ने उल्लेखनीय कार्य किया है। उनके प्रयासों से न केवल सदस्यों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया, बल्कि सहकारिता की भावना भी गांव-गांव में फैली। यह कार्य स्वतंत्रता संग्राम के उन आदर्शों को जीवित रखता है, जिनमें सामूहिक शक्ति से व्यक्तिगत और सामाजिक प्रगति संभव मानी गई थी।स्वतंत्रता दिवस पर हमें याद रखना चाहिए कि आजादी केवल राजनीतिक नहीं, आर्थिक और सामाजिक भी होनी चाहिए। सहकारिता इसी दिशा में एक प्रभावी माध्यम है। अनूपपुर जैसे आदिवासी बहुल जिलों में यदि ऐसी समितियाँ और उनके समर्पित प्रबंधक एवं प्रशासक निरंतर कार्य करते रहें, तो ग्रामीण भारत आत्मनिर्भर बन सकेगा।
भेजिरी, बेनीबारी और लीला टोला की समितियों के ये अधिकारी सहकारिता के सच्चे योद्धा हैं, जिन्होंने अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठा दिखाकर जिले का गौरव बढ़ाया है। इस 15 अगस्त पर हम सभी अनूपपुरवासियों से आह्वान करते हैं कि सहकारिता की राह पर आगे बढ़ें, सामूहिक प्रयास को अपनाएँ और राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। जय हिंद! जय सहकारिता!




